“कविता”

मैं लिखूँगी कविता तुम पर

की किस तरह तुमने मुझको अपनी मीठी बातों से लुभाया था

की किस तरह तुमने अपनी शरारतों से मुझको हँसाया था|

किस तरह तुमने मेरा दिल धड़काया था

किस तरह तुमने मेरे अरमानों को जगाया था|

किस तरह तुमने मुझे सपने दिखाए

और किस तरह तुमने मुझको मौज़ी बनाया था|

किस तरह तुमने मुझको नई साँसे दी

और किस तरह तुमने मेरी ज़िन्दगी को रंगीन बनाया था|

किस तरह मेरे दिल में फिर से मोहब्बत उगाया

किस तरह मेरी धाराओं सी भावनाओं को सम्भाला था|

की किस तरह तुमने मुझको इंतज़ार करवाया

और किस तरह तुमने मेरा दिल दुखाया था|

मैं लिखूँगी कविता तुम पर|

मैं लिख रही हूँ कविता तुम पर|

– हर्षा दुबे

“पसंद है”

उसकी बातें पसंद हैं

उसकी शरारतें पसंद हैं

उसकी हल्की भूरी आँखें

और उसकी मुस्कान पसंद है |

उसकी रंगीन शख़्सियत

उसकी दोस्ती पसंद है

वो मुझको सफ़ेद कमीज़ में बेहद पसंद है |

– हर्षा दुबे